जम्मू-कश्मीरः 32,000 वक्फ संस्थाओं को कमाऊ संपत्ति में बदलेंगी नई अध्यक्ष दरख्शां अंद्राबी

एहसान फाजिली/ श्रीनगर

जम्मू और कश्मीर वक्फ की पहली महिला अध्यक्ष डॉ. दरख्शां अंद्राबी का कहना है कि उनकी योजना “केंद्रशासित प्रदेश में पाक जगहों को विश्वस्तरीय केंद्रों में बदलने की है.” अंद्राबी दुनिया में वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला हैं. एक मशहूर लेखक, कवि और सामाजिक कार्यकर्ता, अंद्राबी की नियुक्ति पिछले महीने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा जम्मू-कश्मीर वक्फ निकाय के पुनर्गठन के बाद हुई थी.

वक्फ बोर्ड का कार्यकाल पांच साल का होता है. बोर्ड की पहली बैठक 16मार्च को जम्मू में हुई थी, जहां डॉ. अंद्राबी को सर्वसम्मति से सदस्यों, डॉ गुलाम नबी हलीम, सुहैल काज़मी, सैयद मोहम्मद हुसैन और नवाब दीन द्वारा अध्यक्ष के रूप में चुना गया था.

आवाज-द वॉयस से बात करते हुए, डॉ. अंद्राबी ने कहा, उनका काम रेखांकित है. उन्होंने कहा, “विभिन्न तीर्थ स्थलों को विश्व स्तरीय केंद्रों में कैसे बदलना है, यह नए बोर्ड की प्राथमिकता होगी.”

उन्होंने अफसोस जताया कि जम्मू-कश्मीर में वक्फ की संपत्ति का “राजनेताओं द्वारा पिछले सात दशकों से अपने सत्ता के खेल के लिए इस्तेमाल किया गया था. अब इसे बदलना होगा. और मैं आपको जम्मू-कश्मीर में विशाल वक्फ सेट-अप को बदलने के लिए अपने सभी ईमानदार प्रयासों का आश्वासन देती हूं.”

जम्मू-कश्मीर का वक्फ बोर्ड धर्मस्थलों और मस्जिदों सहित लगभग 32,000संपत्तियों की देखभाल करता है, जिनमें से 25,000को पिछले साल उपायुक्तों और राजस्व अधिकारियों द्वारा जियो-टैग किया गया है. हाल ही में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू में नए वक्फ निकाय का अभिनंदन करते हुए यह खुलासा किया.

अंद्राबी ने कहा कि जिला प्रशासन के सहयोग से शेष संपत्तियों का सीमांकन और जियो-टैगिंग जल्द की जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वक्फ रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का काम पूरा कर लिया गया है. वह कहती हैं, “हम भी इस पर काम कर रहे हैं.”

ने सूफी आध्यात्मिक संतों के तीर्थस्थलों के प्रबंधन का उल्लेख डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने आवाज़-द वॉयस को बताया, “वक्फ़ प्रबंधन (संपत्ति और राजस्व) में पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता रहेगी,” उन्होंने कहा, इन तीर्थस्थलों को “विशाल सुधार और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की जरूरत है.”

उन्होंने कहा कि वह दरगाहों के प्रबंधन द्वारा जायरीनों के शोषण पर अंकुश लगाना चाहती हैं. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रसिद्ध तीर्थस्थलों पर बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने की जरूरत है.

अंद्राबी ने आध्यात्मिक गौरव के इन स्थानों पर स्वच्छता और स्वच्छता बहाल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया. अंद्राबी ने कहा, “वक्फ संपत्तियों के सभी अतिक्रमणों के खिलाफ जल्द ही एक अभियान शुरू किया जाएगा.” उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों की किराये की नीति की “जल्द ही समीक्षा की जाएगी और इसे फिर से तैयार किया जाएगा ताकि हम केंद्रशासित प्रदेश में प्रमुख स्थानों पर स्थित अपनी संपत्ति से ठीक से आमदनी हासिल कर सकें”.

अंद्राबी ने कहा, “जल्द ही वक्फ (बोर्ड) अतिरिक्त आय के साथ एक आत्मनिर्भर निकाय होगा जिसका उपयोग मानक शैक्षिक, व्यावसायिक और स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना के लिए किया जाएगा.”

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के वक्फ बोर्ड के पहले अध्यक्ष ने पहले छह साल से अधिक समय तक केंद्रीय वक्फ परिषद के सदस्य के रूप में काम किया है. उन्होंने शिक्षा और महिला कल्याण समिति की अध्यक्ष और केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की केंद्रीय वक्फ विकास समिति की अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है.

उन्होंने कहा, “मुख्तार अब्बास नकवी (अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री) के नेतृत्व में, मुझे देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों से निपटने का अवसर मिला और भारत में वक्फ के प्रबंधन के मुद्दों से निपटने का बहुत अनुभव अर्जित किया. ”

उसने कहा, “मैं पिछले सात वर्षों के दौरान भारत में अल्पसंख्यक संपत्ति प्रबंधन में परिवर्तन की गवाह हूं.”

वह कहती हैं, “यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे जम्मू-कश्मीर में वक्फ प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने का बड़ा कार्य सौंपा गया है. अल्लाह ने मुझे दुनिया भर में किसी भी वक्फ निकाय की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला होने के लिए चुना है.”

गौरतलब है कि दरख्शां अंद्राबी एक प्रसिद्ध साहित्यकार हैं, जो उर्दू और कश्मीरी में लिखते हैं. वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और जम्मू-कश्मीर पर कोर ग्रुप की सदस्य और पार्टी प्रवक्ता भी हैं. वह सात साल पहले भाजपा में शामिल हुईं और अपनी सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी (एसडीपी) का इसमें विलय कर दिया. एसडीपी के नेता के रूप में, अंद्राबी “कश्मीरी राजनेताओं की अलगाववादी विचारधारा” के खिलाफ मुखर थीं.

उसने अपनी पीएच.डी. गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर से उर्दू में; उनके पास उर्दू और कश्मीरी कविता के छह संग्रह हैं और साहित्यिक आलोचना पर एक पुस्तक प्रकाशित हुई है. उन्हें 2018में साहित्य में उनके योगदान के लिए राज्य पुरस्कार के अलावा जम्मू-कश्मीर राज्य कला, संस्कृति और भाषा अकादमी से पुरस्कार मिला है.

दरख्शा अंद्राबी कहती हैं, “रमज़ान के पवित्र उपवास महीने के लिए, हम लोगों को परेशानी मुक्त पानी और बिजली की आपूर्ति और अन्य आवश्यक चीजें उपलब्ध कराएंगे.”

साभार: आवाज द वॉइस

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here