दो हजार एकड़ उपजाऊ भूमि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जलमग्न

कैसरगंज/ बहराइच- खेतों में जलभराव की समस्या सेे विकासखंड कैसरगंज के एक दर्जन गांव के किसान परेशान हे । जैसे- कड़सर, बेटोरा, चुल्मभा, बरखुरद्वारापूर, पचलखीं, कुड़ौनी, देवलख़ा, तीवारीपुरवा, बदरौली आदि
दो दशक बीतने को हैं लेकिन गांव के किसानों की समस्या हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जस की तस बनी हुई है।
जिम्मेदार लोग इस पर ध्यान देने को तैयार नहीं है ।

इस जल भराव क्षेत्र में पढ़ने वाले किसानो के खेतो में प्रशासन और जनप्रतिनिधि के लापरवाहीं के चलते यहां खरीफ सीजन की फसल चौपट रहती है, वहीं रवि सीजन मे भी किसानो को जल भराव के चलते फसलों का काफी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी समस्या को लेकर पिछले वर्ष कैसरगंज उप जिलाधिकारी व तहसीलदार को दिया गया था पर कोई कार्यवाही नहीं हुई फिर उसके बाद हम लोग धरना प्रदर्शन किया गया और उसके बाद जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भी दिया गया ना कोई अधिकारी मौके पर आया और न कोई कार्यवाही हुई और आज भी नाला जस का तस पटा पड़ा हुआ है और पानी का निकास बंद है।

किसानों का नेतृत्व कर रहे समाजवादी नेता प्रमोद सिंह जादौन ने बताया कि कड्सर, बिटोरा, चुल्मभा, बरखुरद्वारापूर, पचलखीं, कुड़ौनी, देवलख़ा, तीवारीपुरवा, बदरौली आदि कई गांव के किसानो के उपजाऊ खेत प्रतिवर्ष बरसात के समय जलमग्न हो जाती हैं, जलमग्न खेतों का रकबा लगभग 2000 एकड़ है जो नहर के रास्ते आने वाली पानी और बरसात पानी से भरा रहता है क्योंकि जल निकासी के लिए लगभग 10 वर्ष पहले नाला बना था। जिसको चकपिहानी गांव के राम सतीश वर्मा नाले को पाटकर अपने खेत में मिला लिया और बताया कि नाला मेरे खेत में ही पड़ता है इसलिए मैं उस नाले को पाट लिया और जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।

आखिर किसान मजबूर हैं उनकी कोई सुनने वाला नहीं है, बीते 10 वर्षों से ग्रामीण फसल उगाने के लिए परेशान हैं। खरीफ के सीजन में तो इन किसानों को खाने को लाले पड़ जाते हैं। यदि पक्के नाले का निर्माण हो जाए तो इस 2000 एकड़ जमीन पर फसल लहराने लगेगी और किसान खुशहाल हो जाएंगे।

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