असम के वैज्ञानिक हिफजुर रहमान सिद्दीकी ने लीवर कैंसर पैदा करने वाले प्रोटीन की खोज की

दौलत रहमान/ गुवाहाटी

माता-पिता दोनों की मृत्यु लीवर कैंसर से होने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के फैकल्टी सदस्य डॉ हिफ्जुर रहमान सिद्दीकी के लिए लीवर कैंसर रोग का इलाज एक चुनौती बन गई थी. आज उनके शोध के निष्कर्षों ने वैश्विक चिकित्सा बिरादरी में इस घातक बीमारी के इलाज के लिए आशा जगाई है.

सिद्दीकी कहते हैं, “मेरे पिता मोईन उद्दीन सिद्दीकी की कैंसर से मृत्यु हो गई थी, वहीं मां एस्टोरुन नेसा चौधरी ने लीवर कैंसर से जूझने के बाद अपनी जान गंवा दी. मेरे माता-पिता की मृत्यु मेरे लिए लीवर कैंसर के सटीक कारणों पर गहन शोध करने के लिए एक चुनौती बन गई थी.” उन्हें हाल ही में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत (एनएएसआइ) का सदस्य चुना गया है.

डॉ सिद्दीकी, जिन्होंने लॉस एंजिलिस में साउथ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कीगो माचिदा और अन्य सहयोगियों के साथ शोध किया है, ने पाया है कि मानव शरीर में प्रोटीन बनाने वाली कैंसर कोशिकाएं लीवर में ट्यूमर के विकास का कारण बनती हैं. शोध के अनुसार शराब के अधिक सेवन या हेपेटाइटिस संक्रमण के परिणामस्वरूप मानव शरीर में प्रोटीन बनाने वाली घातक कोशिकाओं का निर्माण होता है.

उन्होंने जोर देकर कहा है कि अनुसंधान दवा डिजाइन के लिए संभावित चिकित्सीय लक्ष्य के रूप में काम कर सकता है और यकृत कैंसर के लिए प्रबंधन रणनीति को दिशा दे सकता है.

सिद्दीकी और उनके अन्य सहयोगियों का अध्ययन हाल ही में प्रतिष्ठित पत्रिका ‘नेचर कम्युनिकेशंस 11’ (2020) में छपा. डॉ सिद्दिकी बताते हैं, “यकृत को हमारे शरीर का पावरहाउस माना जाता है. लेकिन जीवनशैली में बदलाव, शराब ज्यादा पीने और हेपेटाइटिस-वायरस संक्रमण के कारण यकृत कैंसर की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं. हालांकि, इसे अब तक आंशिक रूप से समझा जाता है. कैसे सामान्य यकृत कोशिकाएं वास्तव में कैंसर बन जाती हैं. हमारे निष्कर्षों से वैज्ञानिक समुदाय को वर्तमान समय में यकृत कैंसर के कहर का प्रबंधन करने में मदद मिलने की उम्मीद है.”

वह कहते हैं, “हमारे शोध ने कैंसर पैदा करने वाले प्रोटीन, टीबीसी1डी15के आणविक तंत्र की खोज की है. कैंसर कोशिकाएं और कैंसर स्टेम सेल टीबीसी1डी15जमा करते हैं, जो बीमारी को बढ़ाता है.”

मूल रूप से करीमगंज जिले के एक सुदूर गांव के रहने वाले डॉ हिफ्जुर एक दशक से इन कोशिकाओं पर काम कर रहे हैं और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में कैंसर स्टेम सेल पर अग्रणी शोध शुरू करने के लिए एक समर्पित प्रयोगशाला की स्थापना की है. उन्होंने अपने पेपर के माध्यम से विस्तार से बताया कि शराब के सेवन और हेपेटाइटिस के संक्रमण से स्टेम सेल फैक्टर और कैंसर स्टेम सेल के निर्माण के माध्यम से लीवर कैंसर होता है.

उन्होंने बताया कि लिवर कैंसर ज्यादातर विकासशील या अल्प विकसित देशों में पाया जाता है जहां 80-83%मरीज पाए जाते हैं. डॉ. सिद्दीकी जो एएमयू में जूलॉजी विभाग में एक फैकल्टी भी हैं, ने इन सभी जोखिम कारकों के बीच विस्तार से बताया है, शराब की खपत, हेपेटाइटिस वायरस संक्रमण दुनिया भर में एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है और यकृत कैंसर के लिए महत्वपूर्ण प्रेरक एजेंट माना जाता है. उन्होंने कहा कि अत्यधिक शराब के सेवन से सिरोसिस और अंततः लीवर कैंसर सहित विभिन्न बीमारियां होती हैं

डॉ. सिद्दीकी की पहले की शोध परियोजनाओं ने भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों मंचों पर प्रशंसा अर्जित की थी. उन्हें सोसाइटी ऑफ बेसिक यूरोलॉजिक रिसर्च, यूएसए से यंग साइंटिस्ट अवार्ड -2010 मिला, 2017 में इंडियन एकेडमी ऑफ बायो-मेडिकल साइंसेज से फरहा देबा अवार्ड, बैंकॉक में इनोवेटिव रिसर्चर ऑफ द ईयर 2019 में सोसाइटी ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के रूप में उनके प्रकाशन थे. अमेरिका और भारतीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल-स्ट्रीट जर्नल, द स्ट्रीट द्वारा समय-समय पर प्रकाश डाला गया. 2014 में, संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग के “2014 रिसर्च हाइलाइट्स” खंड द्वारा थेरेपी-प्रतिरोधी कैंसर पर उनके काम को तीन “फीचर्ड प्रोस्टेट कैंसर रिसर्च” कार्यों में से एक के रूप में चुना गया था.

साभार: आवाज दी वॉइस

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here