टिड्डियों से निपटने में सरकार युद्धस्तर की गंभीरता दिखाए

– ऋषि कुमार सिंह

रेड क्रॉस ने रेगिस्तानी टिड्डियों से पूर्वी अफ्रीका में भुखमरी आने की आशंका जताई है. अभी टिड्डियों का राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश (आगरा) तक जो विस्तार सामने आया है, इससे निपटने में चूक भारत में खरीफ सीजन की फसलों को चौपट कर सकता है. अभी ज्यादातर खेत खाली हैं. इसलिए टिड्डियां कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा पा रही हैं. लेकिन जुलाई आते-आते लगभग सारे खेत हरियाली से भर जाएंगे. और इसी वक्त टिड्डियों के बड़े दल का हमला होने का अनुमान भी है. अगर ऐसा हुआ तो ये साल खेती-किसानी के लिए एक तबाही वाला साल साबित हो जाएगा.

इससे बचने का एक ही रास्ता है कि सरकार युद्धस्तर की गंभीरता दिखाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी टिड्डी नियंत्रण के प्रयास करे. हालांकि, भारत ने टिड्डियों का प्रकोप देखते हुए इससे निपटने के लिए पाकिस्तान के सामने ईरान के साथ त्रिपक्षीय रणनीति बनाने का प्रस्ताव रखा है. भारत सरकार ये अच्छा कदम है, क्योंकि इससे टिड्डियों को उनके स्रोत पर खत्म करने में मदद मिलेगी. अब देखना है कि पाकिस्तान इस पर क्या जवाब देता है जिसका 38 फीसदी हिस्सा टिड्डियों के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड बना हुआ है.

टिड्डियों के भारत आने के दो रास्ते हैं. एक रास्ता हॉर्न ऑफ अफ्रीका से शुरू होता है और यमन, बहरीन, कुवैत, कतर, ईरान, सऊदी अरब और पाकिस्तान होकर भारत आता है. दरअसल, ये पूरा रास्ता टिड्डियों के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड की तरह काम करता है. एक टिड्डी का जीवनकाल सामान्य तौर पर तीन से पांच महीना होता है. एक टिड्डी अपने जीवनकाल में कम से कम तीन बार अंडे देती है. एक बार में अंडों की संख्या औसतन 80 होती है. इन अंडों से निकली टिड्डियांआगे सफर करती हैं. हालांकि, हॉर्न ऑफ अफ्रीका से भारत आने का दूसरा रास्ता हिंद महासागर के ऊपर से गुजरता है. इससे टिड्डियां सीधे भारत पहुंचती हैं.

टिड्डियों का एक दल कई किलोमीटर क्षेत्र में फैला हो सकता हैं. एक वर्ग किलोमीटर विस्तार वाले दल में चार करोड़ टिड्डियां हो सकती हैं. ऐसा दल रोजाना 35 हजार इंसानों (प्रति व्यक्ति 2.3 किग्रा.)के बराबर खाना खा सकती हैं. ये हवा के साथ तेजी से सफर कर सकती हैं. ये अधिकतम दूरी 100-200 किमी. हो सकती हैं. अगर नियंत्रित न की जाएं तो टिड्डियां दुनिया के 10 फीसदी लोगों की आजीविका को प्रभावित करने का दमखम ऱखती हैं. फिलहाल कोरोना संकट के साथ भारत और दूसरे दक्षिण एशियाई देशों के सामने टिड्डियों की चुनौती मुंह बाए खड़ी है.

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