शिक्षा नीति-2020 पर MSO ने किया वेबिनार

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े छात्र और युवा संगठनों में से एक मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (MSO) ने नई शिक्षा नीति-2020 पर एक वेबिनार आयोजित किया। जिसमे मुख्य वक्ता के तौर पर जौधपुर स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर अखतरुल वसी, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन और जेसुइट एजुकेशन दक्षिण एशिया के सचिव फादर सनी जैकब एसजे शामिल हुए।

देश भर से ऑनलाइन जुड़े छात्रों, शिक्षकों और स्कॉलर के साथ चर्चा की शुरुआत प्रोफेसर अखतरुल वसी ने की। अपने संबोधन में प्रोफेसर वसी ने शिक्षा नीति-2020 का स्वागत करते हुए एएमयू,जामिया सहित दीगर अल्पसंख्यक संस्थानों के संवेधानिक दर्जे की वकालत की। इसके साथ ही उन्होने कहा कि शिक्षा नीति में किसी भाषा विशेष पर ज़ोर नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होने शिक्षा नीति में अरबी भाषा को शामिल नहीं किए जाने पर भी चिंता जताई।

वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन ने शिक्षा नीति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा व्यवस्था में 10+2 सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। अब 5+3+3+4 सिस्टम को लाया जा रहा है। उन्होने ये भी बताया कि Phil को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। जिसको लेकर उन्होने चिंता वक्त की। उन्होने कहा कि भारतीय छात्रों के Phi खत्म होने पर पीएचडी और अन्य हाइयर कोर्स में परेशानी आ सकती है।

उन्होने बताया कि प्राइमरी स्तर पर मातृ भाषा में शिक्षा जोर दिया गया है। लेकिन ये वैश्वीकरण का समय है। ऐसे में इंग्लिश शिक्षा के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। उन्होने कहा कि आज चीन में भी इंग्लिश शिक्षा पर पूरी तरह से ज़ोर दिया जा रहा है। उन्होने चिंता जताते हुए कहा कि एक तरफ सरकारी स्कूलों में प्राथमिक स्तर के बाद इंग्लिश शिक्षा का प्रावधान किया गया। तो वहीं निजी स्कूलों में इस बारें में नई शिक्षा नीति में कुछ भी नहीं कहा है।

इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार से मौलिक अधिकारों को लेकर भी सवाल किया गया। जिसके जवाब देते हुए उन्होने बताया गया कि शिक्षा नीति-2020 का मौलिक अधिकारों के बजाय संवेधानिक दायित्वों पर ज़ोर है। हालांकि उन्होने कहा कि फिलहाल ये एक ड्राफ्ट है और शिक्षा नीति का रोड मैप आना बाकि है। उन्होने आशा जताई कि नई शिक्षा नीति में बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होने कहा शिक्षा राज्य सूची का भी विषय है। ऐसे में राज्य सरकार भी अपने स्तर पर बदलाव करेंगी।

इसके अलावा फादर सनी जैकब ने अल्पसंख्यक समुदायों की परेशानियों को सभी के सामने रखा। उन्होने बताया कि अल्पसंख्यक समुदायों को संविधान के 393 में अपने शेक्षणिक संस्थानों को चलाने की अनुमति दी गई है। जिसमे धार्मिक शिक्षा भी दी जाने की इजाजत है। उन्होने शिक्षा नीति में इस अभाव को दूर करने की अपील की। एमएसओ अध्यक्ष शुजात अली कादरी ने सभी वक्ताओं को धन्यवाद दिया।

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