‘मुसलमान और मंदिर-मांस की केमिस्ट्री’

श्याम मीरा सिंह

दो दिन पहले तमिलनाडु राज्य के कोयम्बटूर शहर में, दो मंदिरों के सामने एक शख्स मीट(पॉर्क) रखकर गायब हो गया। घटनास्थल मंदिर था, सामने मांस था। पूर्वाग्रहों के अनुसार शक मुस्लिमों पर ही जाना था। वर्तमान भारत के बहुसंख्यक समाज में नरेटिव ही ऐसा है। खबर सूंघते ही तमिलनाडु बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी श्रीनिवासन ने तुरंत इसपर राजनीति करना शुरू कर दिया। हाल तो ऐसे मसलों में अपराधी पकड़े नहीं जाते, दूसरी बात कि मंदिर-मांस की केमिस्ट्री ही ऐसी ही है कि बिना साबित करे ही अपराधी मुसलमान साबित किया जा सकता है। गनीमत रही कि कोयम्बटूर शहर में जगह-जगह CCTV हैं, दूसरी बात कि वहां सरकार भाजपा की नहीं है, हालांकि भाजपा वहां भी सरकार बनाने की लगातार कोशिश ही कर रही है, ऐसे नरेटिव भी भाजपा को खड़ा करने के लिए तैयार किए जाते हैं।

ये भाजपा का देशव्यापी सक्सेजफुल पैटर्न है। पूरे शहर में मुस्लिम विरोधी माहौल बनने लगा। जबकि किसी को नहीं पता था कि अपराधी किस मजहब का है और मंदिर के आगे किस मन्तव्य से मांस रखा गया है। शहर भर के सीसीटीवीज खंगाले जाने पर एक संदिग्ध बाइक का पता चला। जो मंदिर के आगे पार्क की गई। अन्य सीसीटीवीज खंगालने पर कन्फर्म हो गया कि उस बाइक ने ही पास की एक दुकान से मीट खरीदा था। बाइक का नम्बर पता चलने पर पूरा मामला एक्सपोज हो गया। अपराधी का नाम “हरि रामप्रकाश” निकला। जिसका FIR में नाम हरि रामप्रकाश अय्यर बताया जा रहा है। तमिलनाडु में अय्यर ऊंची कास्ट माने जाते हैं, जिनका काम पूजा-पाठ पुरोहितगीरी का ही है। हरि रामप्रकाश की उम्र 48 वर्ष है। शिक्षा से इंजीनियर ग्रेजुएट है। दोबारा पढ़िए इंजीनियरिंग ग्रेजुएट….. ये खबर की है टाइम्स ऑफ इंडिया ने, इसकी लिंक आपको कमेंटबॉक्स में मिल जाएगी।

इस घटना में अपराधी का नाम जब हिन्दू निकला तो शहर का माहौल कुछ शांत हुआ। मुस्लिम निकलता तो शायद राष्ट्रीय मीडिया तक के लिए मसाले का काम करता। ऐसे भी पाकिस्तान, इमरान खान, किंग जोम और रहस्यमयी गुफाएं दिखा-दिखाकर टीवी मीडिया बोर हो लिया है। ये खबर उसे हाथ लग जाती तो बल्ले बल्ले हो जानी थी। इस खबर में रोमांच का पूरा पैकेज है। मंदिर है, मुसलमान है, मांस है, इसे खबरों का MMM (ट्रिपल एम) पैकेज कहा जाना चाहिए। इसमें “मांस जिहाद” जैसे सदाबहार अलंकृत शब्दों से टीवी के हैशटैग सजाए जाते तो मजा ही आ जाता। बहरहाल अब किसी को न्याय नहीं चाहिए। न बीजेपी को, न आरएसएस को, न लोकल पब्लिक को। हरि रामप्रकाश को अब मेंटली अपसेट बता दिया जा रहा है। गजब की बात है “मेंटली अपसेट” जानबूझकर इतने स्ट्रक्सचर्ड तरीके से काम करता है कि पूरा शहर ही “अपसेट” हो जाए।

बाइक चलाना, मांस खरीदना, मंदिर के सामने रख जाना, वह भी एकदम उपयुक्त समय पर जबकि कोई देखने वाला न हो, और गायब हो जाना। ये सब काम एक मेंटली अपसेट व्यक्ति कर जाता है, भारत विचित्र देश है, यहां के अच्छे-भले मस्तिष्क वाले राजनेता इतने करीने से नीतियां नहीं बना पा रहे हैं बल्कि यहां के मेंटली अपसेट नागरिक इतनी बारीकी तरीके से घटनाओं को अंजाम दे जा रहे हैं ।

हरिराम प्रकाश जैसे पूर्वाग्रही नागरिकों के पूर्वाग्रहों से इस समय पूरा देश ग्रसित है लेकिन इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए कि किसी एक घटना का दोषी पूरे समाज को नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन हमारे अंदर ये समझदारी सब समुदायों के लिए होनी चाहिए। फिलहाल इस घटना के बाद शहर में जिस तरह की चुप्पी सजी है उससे यही अनुमान निकलता है कि हम हर घटना में मुसलमान नाम ढूंढने के अभ्यस्त हो चले हैं।


(ये लेखक के निजी विचार है)

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