अब्दुल कलाम पर गर्व है, लेकिन बच्चों के अब्दुल कलाम बनने के सारे रास्ते बंद होंगे?

कृष्ण कांत

नई शिक्षा नीति कहती है कि ‘छठीं क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे. इसके लिए इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी’.

कौन बच्चा है जो छठवीं क्लास में यह तय कर सकता है कि उसे आगे पढ़ाई करनी है या पढ़ाई छोड़कर काम पर जाना है?

बच्चों को इंटर्नशिप करवाने का क्या मतलब है? क्या भारत को दुनिया भर के कॉरपोरेट के लिए सस्ता लेबर मार्केट बनाना है? क्या सरकार कानून बनाकर बाल मजदूरी को वैधता देने जा रही है? क्या इस बहाने का बच्चों का शोषण नहीं होगा? छठवीं का बच्चा मात्र 11-12 साल का होता है. उसे इंटर्नशिप करवाने का विचार खतरनाक है.

मजबूरी में जो मां-बाप अपने बच्चों को काम पर लगा देते हैं, सरकार से आशा की जाती है कि उन्हें बाल मजदूरी से निकाल कर उनकी पढ़ाई लिखाई और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करे. इसके लिए शिक्षा का अधिकार, भोजन का अधिकार जैसे कानून बनाए गए हैं. क्या बच्चों को कानूनी रूप से मजदूरी की तरफ धकेला जाएगा?

यह नीति बाल मजदूरी के विरुद्ध कानून को कमजोर करेगी, जो कि बच्चों के गरिमापूर्ण विकास के लिए खतरनाक है. ऐसे प्रावधानों से बच्चों के प्रति अपराध बढ़ेगा. यह कानून ही अपने आप आपराधिक है, जिसमें बच्चों को व्यावसायिक जगत में उतारने की योजना है.

नई शिक्षा नीति उस अवधारणा के विरुद्ध है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है. इसी के तहत शिक्षा का अधिकार कानून बना था ​ताकि 6 से 14 साल तक के बच्चों के लिए सरकार मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित करे.

क्या सरकार वह रास्ता बंद करना चाहती है, जहां किसी गरीब का बच्चा पढ़ लिखकर आगे जाता है? आप कह रहे हैं कि जब चाहें पढ़ाई छोड़ सकते हैं, डिप्लोमा दे देंगे. क्या कोई पढ़ाई मर्जी से छोड़ता है, या मजबूरी में छोड़ता है?

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