मिनारा मस्जिद में अहसान उलमा का उर्स बड़ी धूमधाम से मनाया गया

मुंबई: मिनारा मस्जिद भांडी बाजार में शनिवार को ईशा की नमाज के बाद अहसान उलमा का उर्स बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में उलेमाओं ने भाग लिया।

उर्स की अध्यक्षता और संचालन पीर तारीकत रहबर शरीयत फखर अल-सादत अमीन मिल्लत डॉ सैयद मुहम्मद अमीन मियां साहिब किबला सज्जादा नशीन खानकाह बरकातिया माराहेरा मुताहेरा ने किया। उर्स में हजरत अल्लामा मौलाना सैयद अमन मियां साहब, हजरत अमीन मिल्लत के शहजादे किबला वलीहाद खानकाह बरकतिया ने भी शिरकत की।

उर्स की शुरुआत पवित्र कुरान की तिलावत से हुई। बारगाह में हजरत अहसन अल-उल-माकी को ख़िराज ए अकीदत पेश करते हुए हजरत अल्लामा मौलाना नूर मुहम्मद साहब ने कहा कि उनका पूरा जीवन शरीयत के पालन में बीता और उनकी दीनी खिदमात को भुलाया नहीं जा सकता है।

वहीं हजरत अल्लामा मौलाना सैयद अब्दुल जलील ने कहा कि हजरत अहसान उलमा को गौस पाक से बड़ी मुहब्बत थी। वे हर कार्यक्रम में गौस पाक का जिक्र किया करते थे। महाराष्ट्र के मुफ्ती हजरत अल्लामा मौलाना मुफ्ती अशरफ रजा ने कहा कि मैंने हजरत अहसान उलमा को बहुत करीब से देखा है। बंबई के लोगों पर उनका बड़ा एहसान है।

हजरत अमीन मिल्लत के शहजादे हजरत अल्लामा मौलाना सैयद अमन मियां ने अपने बयान में कहा कि हजरत अहसान उलमा के चाहने वालों के लिए सबसे अच्छी ख़िराज ए अकीदत उनके घरों में इस्लामी और धार्मिक माहौल बनाना है। अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा भी दें ताकि वे इस्लाम से दूर न हों।

आखिरी में पीर तरीकत रहबर शरीयत फख्र अल-सादत अमीन मिल्लत डॉ. सैयद मुहम्मद अमीन मियां साहिब किबला सज्जादा नशीन खानकाह बरकतिया मरहरा मुताहिरा ने कहा कि तमाम साथियों की जिंदगी हमारे लिए एक मशाल है। किसी भी सहाबा का अपमान स्वीकार्य नहीं है। हमारा मजहब मसलक आला हजरत है।

अंत में उन्होंने कहा कि रजा एकेडमी के संस्थापक अल्हाजी सईद नूरी धर्म को लेकर कुछ न कुछ कर रहे हैं। इस कड़ी में एक कड़ी हजरत सैयद उल उलेमा की किताब का प्रकाशन है। अमीन मिल्लत ने इस किताब का विमोचन किया और दुआ की।

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